Union Budget 2026 27 में भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीककल सेक्टर को सीधा फायदा देने वाला कदम उठाया है जिसमें EV बैटरियों से जुड़े जरूरी पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है। इस फैसले का सीधा असर बैटरी की लागत पर पड़ेगा जिससे आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कार और बाइक ज्यादा किफायती बन सकती हैं। सरकार का फोकस साफ है कि भारत में EV को सिर्फ इस्तेमाल तक सीमित नहीं रखा जाए बल्कि मैन्युफैक्चरिंग हब भी बनाया जाए।
लिथियम आयन बैटरी सेल पर छूट से मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बूस्ट
बजट में लिथियम आयन बैटरी सेल और उनसे जुड़े कैपिटल गुड्स पर सीमाशुल्क में छूट देने की घोषणा की गई है। इससे देश में बैटरी बनाने वाली कंपनियों की लागत घटेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। जब इनपुट सस्ते होंगे तो कंपनियां भारत में ही बड़े स्तर पर बैटरी निर्माण की प्लानिंग कर पाएंगी। यही वजह है कि इस फैसले को EV सेक्टर के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है।
मार्च 2028 तक राहत जारी रहने से कंपनियों को मिलेगी स्थिरता
सरकार ने साफ किया है कि यह छूट सिर्फ एक साल के लिए नहीं बल्कि मार्च 2028 तक लागू रहेगी। इससे ऑटो कंपनियों और बैटरी मैन्युफैक्चरर्स को लंबी अवधि की रणनीति बनाने का भरोसा मिलेगा। जब नीतियां स्थिर होती हैं तो निवेश बढ़ता है और नई टेक्नोलॉजी पर काम तेज होता है। इसका सीधा फायदा भविष्य में ग्राहकों को बेहतर और भरोसेमंद EV के रूप में मिलेगा।
EV चार्जिंग और सप्लाई चेन को भी मिलेगा अप्रत्यक्ष फायदा
SIAM और ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि बैटरी पर मिली राहत सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहेगी। इससे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और सप्लाई चेन में भी सुधार आएगा। जब बैटरी आसानी से और कम कीमत में उपलब्ध होगी तो चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार भी तेज होगा। यह EV अपनाने की रफ्तार को और बढ़ाएगा।
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EV कार और बाइक की कीमतों में आ सकती है राहत
इस पूरे फैसले का सबसे बड़ा असर आम ग्राहक पर देखने को मिल सकता है। जब बैटरी सस्ती बनेगी तो इलेक्ट्रिक कार स्कूटर और बाइक की एक्स शोरूम कीमतों में भी गिरावट आ सकती है। अभी EV की कीमत ज्यादा होने के कारण कई लोग पेट्रोल और डीजल वाहन ही चुनते हैं लेकिन आने वाले समय में यह गैप कम होता दिख सकता है।
Rare Earth और Critical Minerals पर फोकस से मजबूत होगा भविष्य
बजट 2026 में Rare Earth Corridors और Critical Minerals को लेकर भी सपोर्ट की बात की गई है। ये वही कच्चे माल हैं जो EV बैटरी के लिए सबसे जरूरी माने जाते हैं। सरकार का यह कदम भारत को सिर्फ EV यूजर नहीं बल्कि EV टेक्नोलॉजी लीडर बनाने की दिशा में बड़ा संकेत देता है। इससे रिसर्च और डेवलपमेंट को भी नई ताकत मिलेगी।
भारत बन सकता है ग्लोबल EV हब की मजबूत दावेदारी वाला देश
इन सभी फैसलों को मिलाकर देखा जाए तो साफ होता है कि भारत EV सेक्टर को लेकर लंबी दौड़ की तैयारी कर रहा है। बैटरी मैन्युफैक्चरिंग से लेकर वाहन उत्पादन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट तक हर स्तर पर सपोर्ट दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में भारत ग्लोबल EV मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है जो घरेलू बाजार के साथ साथ एक्सपोर्ट पर भी फोकस करेगा।